देश के मशहूर वकील राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में निधन

देश के जाने-माने वकील व पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में रविवार की सुबह निधन हो गया. जेठमलानी बार काउंसिल के चेयरमैन भी रह चुके थे.

दरअसल पिछले दो सप्ताह से उनका इलाज चल रहा था. उनके परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं. इनमें से महेश जेठमलानी और रानी जेठमलानी भी जाने-माने वकील हैं.

राम बूलचंद जेठमलानी का जन्म पंजाब के सिंध प्रांत में 14 सितंबर 1923 को हुआ था. 17 साल की उम्र में कानून की पढ़ाई कर उन्होंने पहला केस सिंध कोर्ट में लड़ा था. उस समय वह सिंध में सबसे कम उम्र के वकील थे.

लेकिन भारत आजाद होने के बाद बंटवारे के समय जब दंगे भड़के. उस समय यानी 1948 में जेठमलानी भारत चले आए. राजनीति में भी जेठमलानी का सफर काफी मजेदार रहा.

2014 में आम चुनाव से पहले जेठमलानी ने नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने का समर्थन किया था. हालांकि मोदी के पीएम बनने के कुछ समय बाद ही वो उनकी आलोचना करने लेगे.

भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें 6 सालों के लिए निष्कासित किया तो वे लालू यादव की पार्टी आरजेडी से संसद में पहुंच गए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राम जेठमलानी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. मोदी ने ट्वीट कर कहा, ”राम जेठमलानी के निधन से भारत ने एक असाधारण वकील और प्रतिष्ठित हस्ती को खो दिया है, जिसका योगदान अदालत और संसद दोनों में था. वो विलक्षण, साहसी और किसी भी विषय पर खुलकर बोलने से नहीं डरने वाले व्यक्ति थे. उनका सबसे अच्छा पहलू यह था कि वो अपने मन की बोलने की क्षमता रखते थे. वो डरते नहीं थे. आपातकाल के दौरान भी जेठमलानी ने लोगों की लड़ाई लड़ी थी. जरूरतमंदों की मदद करना उनके व्यक्तित्व का हिस्सा था. मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि कई मौकों पर उनसे बात करने का अवसर मिला. इस दुखद घड़ी में मेरी संवेदना उनके परिवार के साथ है. वो अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका काम हमेशा जिंदा रहेगा. ओम शांति.”

जेठमलानी अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में कानून मंत्री और शहरी विकास मंत्री रहे. जेठमलानी फिलहाल राष्ट्रीय जनता दल की तरफ से राज्यसभा सांसद थे. वह मुंबई से छठी और सातवीं लोकसभा के लिए दो बार भाजपा के टिकट पर सांसद भी रहे.

बताया जाता है इमरजेंसी कै दौरान गिरफ्तारी वांरट निकलने पर करीब 300 वकीलों ने राम जेठमलानी का केस लड़ा था.

बहुत कम लोगों को पता है कि जेठमलानी ने साल 2004 में अटल बिहार वाजपेयी के खिलाफ लखनऊ से चुनाव भी लड़ा था.

जेठमलानी ने कई हाई प्रोफइल आपराधिक मुकदमों को लड़ा था और इस मामले में उनकी काफी प्रतिष्ठा भी रही है. जेठमलानी ने 78 साल तक वकालत की.

जेठमलानी के हाई-प्रोफाइल मामलों में इंदिरा गांधी हत्या, हर्षद मेहता स्टॉक घपला, केतन पारेख, एलके आडवाणी हवाला, जयललिता की अघोषित संपत्ति, टू-जी में कनिमोई का बचाव, जेसिका लाल मर्डर में मनु शर्मा का बचाव, चारा घोटाला में लालू प्रसाद यादव, खनन घोटाला में येदियुरप्पा का केस, संसद पर हमले में अफजल गुरु का केस, सहारा सेबी केस में सुब्रतो रॉय का बचाव और रामलीला मैदान वाकये में बाबा रामदेव का बचाव अहम हैं.

जेठमलानी ने एक वकील के तौर पर जो भी मामले लड़े, उससे वो हमेशा चर्चा में रहे. देश के बड़े-बड़े मामलों में अभियुक्तों की पैरवी पर उन्होंने हमेशा कहा कि ऐसा करना बतौर वकील उनका कर्तव्य है.

2017 में राम जेठमलानी ने कानूनी पेशे से रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी.

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