कॉलेज में पढ़ना चाहती है मनीषा गोगोई, मदद के लिए मारवाड़ी सम्मेलन और सपोर्ट-ई आगे आए

न्यूज़डेस्क टीम

मेधावी और निर्धन छात्रों की शिक्षा के लिए भले ही सरकार ने कई सारी योजनाएं शुरू की हुई है लेकिन कई बार जानकारी के अभाव और जटिल प्रक्रियाओं के चलते कुछ बच्चों को इसका फायदा नहीं मिल पाता है. 
असम के जोरहाट जिले के सोटाई मोरान गांव की रहने वाली मनीषा गोगोई की कहानी भी कुछ ऐसी है. मनीषा के पिता भूपेन गोगोई सड़क किनारे सब्जियां बेचकर अपने परिवार का खर्च चलाते है. कई बार घर का खर्चा चलाने के लिए मनीषा की मां दीपिका गोगोई को भी आस-पड़ोस में काम करना पड़ता है.
आर्थिक तंगी के ऐसे माहौल में रहने के बावजूद मनीषा बिना किसी ट्यूशन के घर पर पढ़ाई कर पिछले साल (2018) असम माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत 10वीं की परीक्षा में तीन लेटर समेत 73 फीसदी मार्क्स के साथ उतीर्ण हुई थी.
10वीं में बेटी के फर्स्ट डिवीजन आने से न केवल माता-पिता बल्कि गांव के लोग भी काफी ख़ुश हुए थे. लेकिन यह ख़ुशी ज्याद दिन तक नहीं रही. आर्थिक परेशानियों का असर न केवल मनीषा की पढ़ाई पर दिखने लगा बल्कि घरवालों ने 12वीं में दाखिले के समय हाथ खड़े कर दिए.
मनीषा ने 10वीं पास करने के बाद मरियानी कॉमर्स कॉलेज में दाखिला लिया था. हालांकि 11वीं कक्षा में वो उतनी अच्छी रिजल्ट नहीं कर पाई. अब वो 12वीं की पढ़ाई करना चाहती है लेकिन अपने घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसने पढ़ाई छोड़ देने का फैसला कर लिया था.
इस बीच जब इस मेधावी छात्रा की जानकारी पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष मधुसूदन सीकरीया तक पहुंची तो उन्होंने सम्मेलन के जोरहाट शाखा के पदाधिकारी अनिल केजरीवाल ओर शिवभगवान अग्रवाल (मरियानी) की मदद से मनीषा को कॉलेज में एडमिशन के लिए वित्तीय मदद की है. मारवाड़ी सम्मेलन की तरफ से मनीषा गोगोई को 6 हजार रुपए की वित्तीय मदद दी गई है.
पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन मेधावी और निर्धन छात्र-छात्राओं की काफी पहले से मदद करते आ रहा है. फिर चाहे वो विद्यार्थी किसी भी जाती-समुदाय का क्यों न हो.
वहीं सपोर्ट-ई नामक एक सामाजिक संगठन ने भी मनीषा को 12वीं की समूची किताब खरीद कर दी है. सपोर्ट-ई के संस्थापक सदस्य देबोजीत बुढ़ागोहाईं और गौतम देबनाथ भी मनीषा जैसी मेधावी छात्रा की मदद कर काफी खुश है.
देबोजीत बुढ़ागोहाईं कहते है,”ये विद्यार्थी आने वाले समाज का भविष्य है और इनकी मदद करना बेहद जरूरी है. इस अच्छे काम के लिए मैं पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन का भी आभार व्यक्त करता हूं. हमारा संगठन अभी नया है और ऐसे मेधावी छात्र-छात्राओं की मदद करना ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है.”
वो आगे कहते है,”सपोर्ट -ई यानी सपोर्ट एजुकेशन. हम कुछ लोगों ने आर्थिक तौर पर कमजोर विद्यार्थियों की मदद के लिए यह संगठन बनाया हैं. आने वाले दिनों में हम ऐसे कई जरूरतमंद मेधावी विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर वित्तीय मदद देने की योजना बनाने रहें है.”
पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन और सपोर्ट -ई का आभार व्यक्त करते हुए मनीषा ने कहती है,” मेरे घर की आर्थिक हालत पहले से ही खराब है. माता-पिता भी उतने पढ़े लिखे नहीं है. घर का खर्चा चलाने के लिए पिता जी को बहुत परेशानियां उठानी पड़ती है. 12वीं में दाखिला लेने के लिए 4280 रुपए की जरूरत थी, इसलिए मैंने पढ़ाई छोड़ देने का फैसला कर लिया था. लेकिन ईश्वर ने मेरी मदद के लिए दो-दो संगठनों को भेज दिया है. मैं 12वीं में अच्छा रिजल्ट करने का पूरा प्रयास करूंगी.”
मनीषा को अपने घर से कॉलेज तक पहुंचने के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है. वो अपने घर से करीब 4 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक साइकिल चलाकर आती है और फिर वहां से 20 रुपए किराया भरकर ऑटो से कॉलेज पहुंचती है. घर की माली हालत के कारण कई बार वो कॉलेज नहीं आ पाती है. इसी के काण वो 11 वीं में अच्छा रिजल्ट नहीं कर पाई.
फिलहाल मरियानी कॉलेज में अन्य छात्र-छात्राओं का एडमिशन हो चुका है. कुछ ऐसे  विद्यार्थी भी है जो गरीबी रेखा के नीचे के तहत आते है और उन्हें एडमिशन फी में भारी छूट मिली है. एक जानकारी के अनुसार मरियानी कॉलेज में बीपीएल श्रेणी के तहत आने वाले विद्यार्थियों का महज 580 रुपए में दाखिला हुआ है.
दरअसल 2016 में जब असम में भारतीय जनात पार्टी की पहली बार सरकार बनी तो उस दौरान सरकार ने गरीब छात्र-छात्राओं के लिए उच्च माध्यमिक समेत तीन साल के डिग्री कोर्स और पॉलिटेक्निक डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी तरह निशुल्क करने की घोषणा की थी.
उस दौरान शिक्षा मंत्री की जिम्मेवारी संभाल रहे हिमंत विश्व शर्मा ने कहा था कि मुफ्त शिक्षा की इस योजना के तहत राज्य की 300 सरकारी और प्रॉविन्सिएलाइज़्ड कॉलेज को कवर किया जाएगा जिसमें कम से कम 50 से 60 हजार छात्र-छात्राओं को फायदा मिलेगा. हालांकि मनीषा के मामले में कॉलेज से क्यों मदद नहीं मिली, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है. जबकि मनीषा के परिवार की सालाना कमाई 1 लाख रुपए से कम है जो कि मुफ्त शिक्षा योजना की पहली शर्त को पूरा करती है.
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