नाक में ट्यूब, पैरों में बैंडेज और युरिन बैग…मौत से एक घंटे पहले तक काम करते रहे पर्रिकर!

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने 63 वर्ष की आयु में रविवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया. पर्रिकर पिछले एक साल से अग्नाशय के कैंसर से पीड़ित थे. मनोहर पर्रिकर एक बार देश के रक्षामंत्री और चार बार गोवा के मुख्यमंत्री रह चुके थे.

पर्रिकर को फरवरी 2018 में कैंसर के बारे में पता लगा था. इसके बाद करीब 6 महीने तक न्यूयॉर्क में उनका इलाज भी किया गया लेकिन डॉक्टर्स ने भी हाथ खड़े कर दिए थे, जिसके बाद वे वापस गोवा आ गए और अपने आखिरी समय तक काम करते रहे.

पर्रिकर अपने सहयोगियों से अक्सर कहते थे कि अगर मैं बैठ जाऊंगा तो ज्यादा बीमार हो जाऊंगा. उन्हें एक साल पहले यानी फरवरी 2018 में ही पता चल गया था कि उनको कैंसर है. लेकिन इस बात का असर उनके काम पर कभी नहीं दिखा. शायद यही वजह रही कि नाक में ट्यूब, पैरों में बैंडेज और युरिन बैग लिए कड़ी धूप में भी पर्रिकर निर्माणधीन पुल का जायजा लेने पहुंच गए थे. ऐसी हालत में ही उन्होंने विधानसभा में अपनी सरकार का बजट पेश किया था.

गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र आर्लेकर ने पत्रकारों से इस बात का जिक्र करते हुए बताया,” मैं रविवार करीब डेढ़ बजे मनोहर जी से मिलने गया था. वो उस वक्त होश में थे. मैंने उनसे तबीयत के बारे में पूछा तो वो मुझसे काम की बातचीत करने लगे. हालांकि वो अच्छे से नहीं बोल पा रहे थे लेकिन फिर भी लगातार कुछ न कुछ बोलने की कोशिश कर रहे थे. वहां मौजूद डॉक्टर उनको बात न करने की हिदायत दे रहे थे. ऐसे में मैं वहां से लौट आया. लेकिन जैसे ही मैं वापस अपने ऑफिस पहुंचा कि उनके देहांत की खबर आ गई.”

राजेन्द्र आर्लेकर बताते है, “वे इलाज के लिए जब अमेरिका गए थे उस दौरान भी वे वहां से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर काम की मॉनीटरिंग करते रहते थे. कैंसर के बाद भी जिस दिन वह ऑफिस नहीं आ पाते उस दिन घर से ही काम करते थे. घर पर मंत्रिमंडल की बैठक लेते थे.”

पर्रिकर की सादगी और प्रशासनिक कार्यों पर उनकी छाप को लोग सालों तक याद करेंगे. उनके निधन पर बीजेपी के शीर्ष से लेकर जमींनी स्तर के नेता तक ने दुख वयक्त किया है. विपक्ष के नेताओं ने भी पर्रिकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है.

राजनीति के जानकार बताते है पर्रिकर भारतीय जनता पार्टी के ऐसे पहले राजनेता होंगे जिन्होंने खुद को ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के आइकन के रूप में आगे रखते हुए सभी समुदायों को शांति का संदेश दिया वो भी ऐसे माहौल में जब उनकी पार्टी देश के दूसरे हिस्सों में हिंदुत्व पर आक्रामक रूप अपनाए हुई थी.

एक किस्से का जिक्र करते हुए राजेन्द्र आर्लेकर ने बताया कि 2004 के फिल्म फेस्टिवल में सब मेहमान भी हैरान रह गए थे जब पर्रिकर पसीने से लथपथ होकर पुलिसवालों के साथ ट्रैफिक कंट्रोल कर रहे थे. वहीं बेटे की शादी में सब सूट-बूट में थे तो वहीं पर्रिकर हाफ शर्ट, क्रीज वाली साधारण पैंट और सैंडिल में मेहमानों की आवभगत कर रहे थे.

मौजूदा राजनीति में जहां नेता अपनी छोटी सी सफलता (आम लोगों में स्वीकारता) के बाद हाई प्रोफाइल हैसियत में आ जाते है वहीं पर्रिकर थे जो आईआईटी से पास पहले इंजीनियर मुख्यमंत्री बने, देश के रक्षा मंत्री बने लेकिन लो प्रोफाइल जीवन बिताया. यही वो वजह है कि आज समूचा देश उन्हें याद कर रहा है.

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