दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ ‘मारपीट’ का मामला, हड़ताल पर गए आईएएस

दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ हुई कथित मारपीट मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार के कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर चले गए हैं. इससे पहले मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में उन्हें पीटा. दिल्ली सरकार के आईएएस अधिकारियों के हड़ताल पर जाने से दिल्ली में प्रशासनिक संकट गहरा गया है.

आईएएस अधिकारियों का कहना है कि मुख्य सचिव पर हमला करने वाले विधायकों की जब तक गिरफ्तारी नहीं हो जाती तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे. दिल्ली के आईएएस संघ ने आरोपी विधायकों को गिरफ्तार करने की मांग भी की है. आईएएस संघ ने इस घटना को लेकर गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने का फैसला किया है.

दिल्ली एडमिनिस्ट्रेटिव सवारडिनेट सर्विसेज के अध्यक्ष डीएन सिंह ने कहा, ‘हमने उप-राज्यपाल से इस घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. यह संवैधानिक संकट की तरह है. हमने यहां कभी इस तरह की घटना होते हुए नहीं देखी है. हम तत्काल प्रभाव से हड़ताल पर जा रहे हैं. हम अपने मुख्य सचिव के साथ हैं. मुख्य सचिव पर हमला करने वाले आरोपी जब तक गिरफ्तार नहीं हो जाते, हम काम पर नहीं लौटेंगे.’

आप के एक नेता ने कहा, ‘सीएम आवास पर हमारी मीटिंग थी रात में 12 बजे. आप के कुछ विधायक 10 बजे और कुछ 11 बजे तक वहां पहुंच गए थे. हमने मुख्य सचिव से लोगों को राशन न मिलने की शिकायत की. उन्होंने विधायकों के सवालों का जवाब नहीं दिया. मुख्य सचिव ने कहा कि उनकी जवाबदेही उप-राज्यपाल को है और यह कहने के बाद वह बैठक छोड़कर चले गए. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल वहां बैठे हुए थे. हमारे कुछ विधायक बाहर गए और उन्हें रोका लेकिन वे रुके नहीं. मुख्य सचिव के साथ हाथापाई की बात गलत है.’

दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा, ‘मुझे यह लगता है मुख्य सचिव के साथ हुई मारपीट पूर्व नियोजित थी. मुख्य सचिव को 12 बजे रात में बुलाने की क्या जरूरत थी. इस हिंसक घटना की शीर्ष स्तर पर जांच होनी चाहिए. केजरीवाल सरकार को बैठक से जुड़ी सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करनी चाहिए. ये एक तरह का आतंक है.’ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘दिल्ली के इतिहास में यह काला दिन है और यहां संवैधानिक संकट पैदा हो गया है.’

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष माकन ने आरोप लगाया कि आप सरकार निकम्मी है. सीएम के सामने मुख्य सचिव को विधायकों द्वारा पीटा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. यह सरकारी असफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने का तरीका है. आप को शासन चलाने नहीं आता है और यह सरकार पूरी तरह असफल है. इस घटना के बाद बीजेपी ने केजरीवाल सरकार को अराजक करार देने के बाद राजधानी में राष्ट्रपति शासन की मांग कर रही है.

हालांकि मुख्यमंत्री केजरीवाल के कार्यालय ने ऐसी किसी भी घटना से साफ इनकार किया है. आप ने आरोप लगाया है कि मुख्य सचिव ने कुछ विधायकों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और बिना सवालों के जवाब दिए वहां से चले गए.

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