नागालैंड में विधानसभा चुनाव करवाने के पक्ष में बीजेपी, पार्टी नेता खेतो सेमा निलंबित

नागालैंड में सत्तारूढ़ पार्टी एनपीएफ, कांग्रेस समेत 11 सियासी दलों ने विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है.  राजधानी कोहिमा में सोमवार को आयोजित एक बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने नागा मसले के समाधान की मांग का समर्थन करते हुए यह फैसला लिया हैं.  इस बैठक में नागालैंड बीजेपी के उपाध्यक्ष खेतो सेमा भी मौजूद थे और उन्होंने अपनी पार्टी की तरफ से चुनाव के बहिष्कार वाले फैसले का समर्थन किया था.

लेकिन इस बीच बीजेपी ने पार्टी  नेता खेतो सेमा को निलंबित कर दिया हैं. पार्टी का कहना है कि सेमा ने केंद्रीय नेताओं की अनुमति के बिना  उस बयान पर हस्ताक्षर किया हैं जिसमें दावा किया गया है कि राजनीतिक पार्टियां नागालैंड चुनाव में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी और  न ही नामांकन दाखिल करने की अनुमति देगी. बीजेपी नेता सेमा के इस कार्य को पार्टी-विरोधी गतिविधि बता रहें हैं.

नागालैंड बीजेपी के अध्यक्ष विसासोलिए लहौंगो  ने कहा,’यह एक काफी महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा हैं. इस पर किसी भी तरह की सहमति जताने से पहले हमें अपनी पार्टी के केंद्रीय नेताओं का परामर्श लेना होगा.हम खुद से एकतरफा निर्णय नहीं ले सकते.’

उन्होंने कहा, ‘सेमा को पार्टी ने निलंबित इसलिए नहीं किया है कि वे राजनीतिक दलों की बैठक में भाग लेने गए थे.उन्हें हमने ही बैठक में भेजा था. लेकिन किसी तरह के फैसले पर हस्ताक्षर करने का अधिकार पार्टी ने उन्हें नहीं दिया हैं. नागालैंड में चुनाव वहिष्कार से जुड़े किसी भी फैसले पर हस्ताक्षर करने से पहले उन्हें पार्टी के शीर्ष केंद्रीय नेताओं से अनुमति लेनी चाहिए थी.’

नागा मसले को सुलझाने की मांग शीर्ष आदिवासी संगठन नागा होहो समेत कई प्रमुख नागरिक संगठन कर रहें हैं. इन्हीं संगठनों की बैठक के बाद 11 राजनीतिक पार्टियों ने  उनके ‘चुनाव नहीं, समाधान’ की मांग पर सहमती जताई हैं.

आदिवासी संगठन नागा होहो ने राज्य में 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनावों को टाल देने की वकालत करते हुए कहा कि सात दशक से अधिक पुराने नागा मसले का समाधान निकालने की पहले आवश्यकता है.

नागा होहो कोर कमिटी के एक पदाधिकारी का कहना है कि राजनीतिक दलों ने 27 फरवरी को राज्य में होने वाले चुनाव में खड़े नहीं होने की हमारी मांग पर सहमति जताई है. हम नागा समस्या का समाधान चाहते हैं. दलों के दस्तखत वाले संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया है, ‘नागा लोगों की सर्वसम्मत राय है कि राजनीतिक समाधान या नागा शांति समझौता, चुनाव से ज्यादा महत्वपूर्ण है और इस वजह से अमन चैन के लिए नागालैंड के विधानसभा चुनाव को टालना जरूरी है.’

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने एक ट्वीट कर कहा कि ‘हम नागालैंड ट्राइब्ल होहो एंड सिविल आर्गेनाईजेशन के कोर कमिटि की भावनाओं को समझते हैं लेकिन चुनाव का वहिष्कार कोई समाधान नहीं हैं. प्रधानमंत्री मोंदी जी की प्रतिबद्धता पर विश्वास रखें’

उन्होंने एक और ट्वीट कर कहा कि समय पर चुनाव करवाना एक संवैधानिक प्रक्रिया हैं. सरकार संविधान द्वारा बाध्य है. भारत सरकार लंबे समय से लंबित नागा मुद्दे को काफी महत्व देती आ रही है. हमारा मानना है कि नागालैंड में शांतिपूर्ण चुनाव चल रही शांति वार्ता को अधिक सुविधा प्रदान करेगा और हमारी प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा.

नागा होहो ने 1998 में चुनाव का बहिष्कार करने की अपील की थी लेकिन अंतिम मौके पर सत्तारूढ कांग्रेस ने नामांकन दायर कर दिया था और पार्टी 60 में से 59 सीट जीत गई थी. भाजपा के नगालैंड के प्रभारी राम माधव ने हाल ही में डिमापुर में कहा था कि प्रदेश की नई सरकार नागा मुद्दे का समाधान लेकर आएगी और यह संवैधानिक जरूरत है कि पहले चुनाव कराया जाए.

नागालैंड की सत्ता पर नागा पीपुल फ्रंट और बीजेपी गठबंधन की साझा सरकार है.

 

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